डेड पिक्सेल जाँच
स्क्रीन को लाल, हरे, नीले, सफ़ेद और काले से भरकर वे बिंदु उभारता है जो बुझे रहते हैं (डेड पिक्सेल), जो जले रहते हैं (अटके पिक्सेल), और किनारों पर बैकलाइट का रिसाव या धब्बे। नया मॉनिटर आने के दिन सबसे पहले यही करना चाहिए।
🔧 ब्राउज़र में चलती है। कुछ इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं, कुछ अपलोड नहीं होता।
कोई एक रंग चुनें और पूरी स्क्रीन उसी से भर जाती है। स्क्रीन के पास जाकर देखिए कि किसी और रंग का बिंदु दिख रहा है या नहीं।
क्लिक या → कुंजी से अगला रंग, Esc से बाहर। चमक पूरी बढ़ाकर देखने पर ज़्यादा साफ़ दिखता है।
ऐसे समझिए
- डेड पिक्सेल — हर रंग पर काला ही रहे तो वह पिक्सेल मर चुका है।
- अटका पिक्सेल — काली स्क्रीन पर एक लाल, हरा या नीला बिंदु जला रहे तो सब-पिक्सेल अटक गया है। कुछ दिन इस्तेमाल में कभी अपने आप ठीक भी हो जाता है।
- बैकलाइट रिसाव — काली स्क्रीन के किनारे सफ़ेदी लिए दिखें तो बैकलाइट रिस रही है; LCD में कुछ हद तक यह सामान्य है।
- धब्बे — सलेटी स्क्रीन पर चौड़ा गहरा हिस्सा दिखे तो पैनल दबा हुआ हो सकता है।
हर कंपनी बदलने की शर्त (कितने ख़राब पिक्सेल) अलग रखती है। मिलने के दिन ही जाँच लें और तस्वीरें रख लें।
यह जाँच क्या देखती है
- पूरी स्क्रीन के पाँच सादे रंग
- सलेटी ग्रेडिएंट (बैंडिंग)
- रंग का फैलाव और छाया
- किनारों पर बैकलाइट रिसाव
अन्य उपकरण जाँच
नतीजे आपके ब्राउज़र और ड्राइवर पर निर्भर करते हैं। यहाँ कुछ गड़बड़ लगे तो हार्डवेयर की ख़राबी मान लेने से पहले वही जाँच दूसरे ब्राउज़र में कर देखें।