नाड़ी दाब
नाड़ी दाब हर धड़कन पर धमनी दाब का उतार-चढ़ाव है। 60 mmHg या उससे ऊपर के मान धमनियों के कड़ेपन का संकेत माने जाते हैं।
आपके अंक
नाड़ी दाब
50mmHg
प्रतिशत
38.5%
इसका मतलब
50 mmHg की नाड़ी दाब सामान्य दायरे (30–50) में है।
सूत्र
नाड़ी दाब = सिस्टोलिक − डायस्टोलिक
उम्र के साथ डायस्टोलिक गिरता है और सिस्टोलिक चढ़ता है, इसलिए नाड़ी दाब क़ुदरती तौर पर चौड़ा होता जाता है।
क्या लिखना है
| इनपुट | डिफ़ॉल्ट | स्वीकार्य दायरा |
|---|---|---|
| सिस्टोलिक (mmHg) | 130 | 50 ~ 260 |
| डायस्टोलिक (mmHg) | 80 | 30 ~ 160 |
चरण दर चरण
मान के हिसाब से परिणाम
बाक़ी सब वैसा ही रखकर सिर्फ़ सिस्टोलिक (mmHg) बदलने पर के परिणाम।
| सिस्टोलिक (mmHg) | नाड़ी दाब (mmHg) | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| 65 | -15 | -23.1 |
| 97.5 | 18 | 17.9 |
| 130 | 50 | 38.5 |
| 195 | 115 | 59 |
| 260 | 180 | 69.2 |
हर परिणाम का मतलब
| परिणाम | डिफ़ॉल्ट मान पर |
|---|---|
| नाड़ी दाब (mmHg) | 50 |
| प्रतिशत (%)100 के पैमाने पर बताया गया हिस्सा। | 38.5 |
आम ग़लतियाँ
उम्र के साथ डायस्टोलिक गिरता है और सिस्टोलिक चढ़ता है, इसलिए नाड़ी दाब क़ुदरती तौर पर चौड़ा होता जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. नाड़ी दाब कैसे निकाला जाता है?
नाड़ी दाब = सिस्टोलिक − डायस्टोलिक — नाड़ी दाब हर धड़कन पर धमनी दाब का उतार-चढ़ाव है। 60 mmHg या उससे ऊपर के मान धमनियों के कड़ेपन का संकेत माने जाते हैं।
Q. एक उदाहरण से समझाइए।
सिस्टोलिक 130mmHg, डायस्टोलिक 80mmHg पर उत्तर नाड़ी दाब 50mmHg है।
Q. क्या-क्या लिखना है?
सिस्टोलिक, डायस्टोलिक लिखें। लिखते ही गणना दोबारा हो जाती है, और ख़ाली खाना शून्य माना जाता है।
Q. कोई अंक बदलूँ तो परिणाम कितना हिलता है?
सिर्फ़ सिस्टोलिक (mmHg) बदलने पर परिणाम सिस्टोलिक (mmHg) 65 → नाड़ी दाब (mmHg) -15 और सिस्टोलिक (mmHg) 260 → नाड़ी दाब (mmHg) 180 हो जाता है। नीचे की सारणी में पाँच चरण दिए हैं।
Q. अंक कहाँ तक गोल किए जाते हैं?
रक़म पूरी इकाई तक, प्रतिशत एक दशमलव तक और बाक़ी दो दशमलव तक दिखाए जाते हैं। दिखने वाला अंक गोल किया हुआ है; गणना बिना गोल किए मान से आगे बढ़ती है।
Q. किस बात का ध्यान रखें?
उम्र के साथ डायस्टोलिक गिरता है और सिस्टोलिक चढ़ता है, इसलिए नाड़ी दाब क़ुदरती तौर पर चौड़ा होता जाता है।
साथ काम आने वाले कैलकुलेटर
ये कैलकुलेटर सेहत के आँकड़े समझने में मदद करते हैं; ये निदान या दवा की जगह नहीं लेते। लक्षण हों तो डॉक्टर को दिखाएँ।