आपकी यात्रा
टंकी-से-टंकी नाप, डैशबोर्ड के औसत से ज़्यादा भरोसेमंद है।
ईमानदारी से नापने का तरीक़ा
टंकी फ़ुल कराइए, ट्रिप मीटर शून्य कीजिए, चलाइए, फिर फ़ुल कराइए। दूसरी बार जितना ईंधन गया, ठीक उतना ही ख़र्च हुआ था, और ट्रिप मीटर दूरी बताता है। सिर्फ़ एक चीज़ हर बार एक जैसी रखनी है — "फ़ुल" का मतलब। हर बार पहली बार नोज़ल बंद होने पर रुक जाना ही आंकड़े को स्थिर रखता है।
चार इकाइयाँ, नाप एक ही
प्रति मात्रा दूरी (किमी/लीटर, mpg) गाड़ी के किफ़ायती होने पर बढ़ती है; प्रति दूरी मात्रा (लीटर/100 किमी) घटती है। एक ही बात दो तरह से लिखी गई है, पर बचत दूसरी में बेहतर दिखती है: 10 से 9 लीटर/100 किमी पर आना, 5 से 4 पर आने से कहीं ज़्यादा ईंधन बचाता है।
डैशबोर्ड ज़रा उदार रहता है
गाड़ी का औसत माइलेज आमतौर पर टंकी-से-टंकी नाप से कुछ प्रतिशत ऊपर दिखता है। ख़ुद हाथ से नापा आंकड़ा ज़्यादा भरोसेमंद है, और हर बार एक ही तरीक़े से नापना उससे भी ज़्यादा काम का। एक टंकी का आंकड़ा उस हफ़्ते के ट्रैफ़िक के बारे में बताता है, गाड़ी के बारे में नहीं।
आए ही हैं तो — क्रिप्टो एक्सचेंज बोनस पाएँ
और कैलकुलेटर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. अमेरिकी गैलन या इंपीरियल?
दोनों दिखाए गए हैं। अमेरिकी गैलन 3.785 लीटर का है और इंपीरियल 4.546 का, इसलिए वही गाड़ी इंपीरियल mpg में क़रीब 20% बेहतर दिखती है। कौन-सा, बताए बिना mpg कहना उलझन की आम वजह है।
Q. मेरा माइलेज कंपनी के आंकड़े से कम क्यों है?
कंपनी के आंकड़े एक तय परीक्षण चक्र से आते हैं, आपके रोज़ के रास्ते से नहीं। छोटी दूरियाँ, ठंडी शुरुआत, चढ़ाई, छत का कैरियर, एसी और तेज़ त्वरण — ये सब ऐसा ईंधन ख़र्च करते हैं जो परीक्षण को दिखता ही नहीं।
Q. बचे हुए ईंधन में कितना चल सकता हूँ?
नापे हुए माइलेज को बचे ईंधन से गुणा कीजिए — पर गुंजाइश छोड़िए। टंकी का आख़िरी हिस्सा सबसे कम भरोसे से नापा जाता है, और माइलेज ठीक उन्हीं हालात में गिरता है जब ईंधन ख़त्म होना सबसे असुविधाजनक होता है।