रोज़ का रेशा लक्ष्य
संदर्भ है प्रति 1,000 kcal पर 14 g, तो 2,200 kcal के लिए लगभग 31 g। यह खाने के साथ बढ़ता है, इसलिए ज़्यादा खाने वालों को ज़्यादा रेशा चाहिए।
आपके अंक
रेशा
30.8g
हर भोजन में रेशा
10.3g
कैलोरी
2,200kcal
सूत्र
रेशा = कैलोरी ÷ 1000 × 14
एकदम बढ़ाने पर गैस और मरोड़ होती है। हफ़्ते में लगभग 5 g जोड़ें और साथ में पानी भी बढ़ाएँ।
क्या लिखना है
| इनपुट | डिफ़ॉल्ट | स्वीकार्य दायरा |
|---|---|---|
| कैलोरी (kcal)ऊर्जा, किलोकैलोरी में। | 2,200 | 500 या ज़्यादा |
चरण दर चरण
मान के हिसाब से परिणाम
बाक़ी सब वैसा ही रखकर सिर्फ़ कैलोरी (kcal) बदलने पर के परिणाम।
| कैलोरी (kcal) | रेशा (g) | हर भोजन में रेशा (g) | कैलोरी (kcal) |
|---|---|---|---|
| 1,100 | 15.4 | 5.1 | 1,100 |
| 1,650 | 23.1 | 7.7 | 1,650 |
| 2,200 | 30.8 | 10.3 | 2,200 |
| 3,300 | 46.2 | 15.4 | 3,300 |
| 4,400 | 61.6 | 20.5 | 4,400 |
हर परिणाम का मतलब
| परिणाम | डिफ़ॉल्ट मान पर |
|---|---|
| रेशा (g) | 30.8 |
| हर भोजन में रेशा (g) | 10.3 |
| कैलोरी (kcal)ऊर्जा, किलोकैलोरी में। | 2,200 |
आम ग़लतियाँ
एकदम बढ़ाने पर गैस और मरोड़ होती है। हफ़्ते में लगभग 5 g जोड़ें और साथ में पानी भी बढ़ाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. रोज़ का रेशा लक्ष्य कैसे निकाला जाता है?
रेशा = कैलोरी ÷ 1000 × 14 — संदर्भ है प्रति 1,000 kcal पर 14 g, तो 2,200 kcal के लिए लगभग 31 g। यह खाने के साथ बढ़ता है, इसलिए ज़्यादा खाने वालों को ज़्यादा रेशा चाहिए।
Q. एक उदाहरण से समझाइए।
कैलोरी 2,200kcal पर उत्तर रेशा 30.8g है।
Q. क्या-क्या लिखना है?
कैलोरी लिखें। लिखते ही गणना दोबारा हो जाती है, और ख़ाली खाना शून्य माना जाता है।
Q. कोई अंक बदलूँ तो परिणाम कितना हिलता है?
सिर्फ़ कैलोरी (kcal) बदलने पर परिणाम कैलोरी (kcal) 1,100 → रेशा (g) 15.4 और कैलोरी (kcal) 4,400 → रेशा (g) 61.6 हो जाता है। नीचे की सारणी में पाँच चरण दिए हैं।
Q. अंक कहाँ तक गोल किए जाते हैं?
रक़म पूरी इकाई तक, प्रतिशत एक दशमलव तक और बाक़ी दो दशमलव तक दिखाए जाते हैं। दिखने वाला अंक गोल किया हुआ है; गणना बिना गोल किए मान से आगे बढ़ती है।
Q. किस बात का ध्यान रखें?
एकदम बढ़ाने पर गैस और मरोड़ होती है। हफ़्ते में लगभग 5 g जोड़ें और साथ में पानी भी बढ़ाएँ।
साथ काम आने वाले कैलकुलेटर
ये कैलकुलेटर सेहत के आँकड़े समझने में मदद करते हैं; ये निदान या दवा की जगह नहीं लेते। लक्षण हों तो डॉक्टर को दिखाएँ।