अल्पविराम, स्पेस या नई पंक्ति — कुछ भी चलेगा
सिर्फ़ औसत धोखा दे सकता है
0, 0, 0, 0, 100 का औसत 20 है — मगर इनमें से कोई भी संख्या 20 के आसपास नहीं है। जब आंकड़े एक तरफ़ जमा हों या कोई बहुत बड़ा मान बीच में आ जाए, तो औसत किसी चीज़ का प्रतिनिधित्व नहीं करता। इसीलिए माध्यिका साथ देखनी चाहिए: इस सूची की माध्यिका 0 है, और वही सच्ची कहानी कहती है।
माध्यिका और बहुलक
मानों को क्रम में लगाइए — बीच वाला मान माध्यिका है; संख्या सम हो तो बीच के दो मानों का औसत। एक बहुत बड़ा मान इसे मुश्किल से हिला पाता है, इसीलिए आमदनी और मकान के दाम लगभग हमेशा माध्यिका में बताए जाते हैं। बहुलक वह मान है जो सबसे ज़्यादा बार आया हो — और हर मान एक-एक बार ही आया हो, तो बहुलक होता ही नहीं।
दो मानक विचलन, जान-बूझकर
अगर आपके आंकड़े पूरा समूह हैं — कक्षा के सारे विद्यार्थी, सीज़न के सारे मैच — तो n से भाग दीजिए (समष्टि)। अगर वे किसी बड़े समूह से लिया गया नमूना हैं, तो n−1 से (प्रतिदर्श, बेसेल संशोधन): नमूने का अपना औसत सच्चे औसत के मुक़ाबले नमूने के ज़्यादा क़रीब बैठता है, इसलिए n से भाग देने पर फैलाव असल से कम आंका जाता। नमूना जितना छोटा, दोनों का अंतर उतना बड़ा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कौन-सा मानक विचलन इस्तेमाल करूँ?
पूछिए कि आंकड़े पूरा समूह हैं या नमूना। 30 बच्चों की कक्षा को उन्हीं के अंकों पर परखना: समष्टि (n)। 30 लोगों से पूछकर पूरे शहर का अनुमान लगाना: प्रतिदर्श (n−1)। n बड़ा हो तो दोनों लगभग बराबर आते हैं — यह चुनाव छोटे आंकड़ों में ही मायने रखता है।
Q. मेरा औसत और माध्यिका इतने अलग क्यों हैं?
आंकड़े एक तरफ़ झुके हैं — एक तरफ़ के थोड़े-से मान औसत को खींच लेते हैं जबकि माध्यिका अपनी जगह रहती है। तनख़्वाह इसकी क्लासिक मिसाल है: एक अफ़सर की मोटी तनख़्वाह पूरे दफ़्तर का औसत उठा देती है। दोनों में फ़र्क़ दिखे तो माध्यिका ही ईमानदार सारांश होती है।
Q. "बहुलक नहीं" का क्या मतलब है?
आपकी सूची का हर मान ठीक एक बार आया है, इसलिए कोई "सबसे ज़्यादा बार" नहीं है। बहुलक उन्हीं आंकड़ों में काम आता है जो दोहराते हैं — जूतों के नंबर, सर्वे के जवाब, पासे के अंक। कई दशमलव वाली मापों में यह शायद ही कुछ बताता है।