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लोन चुकौती के तरीक़ों की तुलना

बराबर EMI, घटती किश्त और सिर्फ़-ब्याज (बुलेट) — एक ही लोन पर आमने-सामने

लोन की शर्तें

मुद्रा वही है जो आप डालें। स्थिर दर, बीच में कोई पूर्व-भुगतान नहीं।

एक ही क़र्ज़ के तीन रूप

बराबर EMI में हर महीने उतनी ही रक़म जाती है — शुरुआत में ज़्यादातर ब्याज, अंत में ज़्यादातर मूलधन। घटती किश्त में मूलधन का बराबर टुकड़ा और बचे हुए पर ब्याज जाता है, इसलिए पहला महीना सबसे भारी और आगे के हल्के होते जाते हैं। सिर्फ़-ब्याज (बुलेट) में महीने-दर-महीने केवल ब्याज जाता है और मियाद पूरी होने पर पूरा मूलधन एक साथ।

कुल ब्याज मूलधन घटने की रफ़्तार से तय होता है

ब्याज बक़ाया रक़म पर लगता है, इसलिए जो तरीक़ा बक़ाया सबसे तेज़ घटाता है — घटती किश्त — वही सबसे सस्ता पड़ता है, और बुलेट, जिसमें बक़ाया हिलता ही नहीं, सबसे महँगा: उसी लोन पर घटती किश्त का लगभग ठीक दुगना। बराबर EMI बीच में रहती है।

सौदा है पहले महीने का बोझ बनाम कुल लागत

घटती किश्त सबसे सस्ती है पर सबसे भारी शुरुआत के साथ। बराबर EMI थोड़े ज़्यादा ब्याज के बदले सपाट, योजना बनाने लायक़ किश्त देती है। बुलेट सबसे हल्के महीने सबसे ऊँची कुल लागत पर देता है, और अंत में चुकौती की खाई। सबसे छोटे कुल से नहीं, अपनी जेब जो हर महीने उठा सके, उससे चुनिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. घटती किश्त में ब्याज कम क्यों लगता है?

पहले ही महीने से बक़ाया पूरी रफ़्तार से गिरने लगता है, इसलिए हर अगले महीने छोटी रक़म पर ब्याज लगता है। पूरी अवधि में मोटे तौर पर आधे मूलधन पर ब्याज जाता है; बुलेट में पूरे समय पूरे मूलधन पर।

Q. बराबर EMI की शुरुआती किश्तें ज़्यादातर ब्याज क्यों होती हैं?

ब्याज बक़ाया पर लगता है, और बक़ाया शुरुआत में सबसे बड़ा होता है। किश्त तय है, इसलिए ब्याज जो नहीं खा जाता वह मूलधन में जाता है — और बक़ाया घटने के साथ यह हिस्सा हर महीने बढ़ता है।

Q. सिर्फ़-ब्याज कब समझ में आता है?

जब मूलधन सचमुच कहीं और से आना हो: कोई संपत्ति बिकनी हो, कोई निवेश परिपक्व होना हो, बीच की जुगत हो। किश्त घटाने की तरकीब के तौर पर यह सबसे महँगा रास्ता है — और पूरा मूलधन अंत में फिर भी खड़ा मिलता है।