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209 एक्सपोज़र खाने — f/11 असल में 11.314 है और 1/60 s असल में 1/64 s

एक्सपोज़र का पैमाना ज्यामितीय है — हर पायदान पर रोशनी दोगुनी — पर डायल पर गोल किए हुए, पढ़ने में आसान अंक खुदे होते हैं। इसलिए दोनों पैमानों की स्थिति जोड़ने पर EV पूर्णांक निकलता है, और खुदे अंकों को लघुगणक में डालने पर 0.174 तक भटकता है। 209 खाने (ग्यारह अपर्चर × उन्नीस शटर) दोनों मान रखते हैं।

EV (पायदान से)

अपर्चर \ शटर · ISO 100

एक्सपोज़र वैल्यू तालिका — 209 अपर्चर × शटर खाने
1/80001/40001/20001/10001/5001/2501/1251/601/301/151/81/41/21"2"4"8"15"30"
f/1131211109876543210-1-2-3-4-5
f/1.414131211109876543210-1-2-3-4
f/21514131211109876543210-1-2-3
f/2.8161514131211109876543210-1-2
f/417161514131211109876543210-1
f/5.61817161514131211109876543210
f/819181716151413121110987654321
f/11201918171615141312111098765432
f/162120191817161514131211109876543
f/2222212019181716151413121110987654
f/32232221201918171615141312111098765

पैमाना गोल करके खुदा होता है

अपर्चर √2 के गुणक में बढ़ते हैं, इसलिए असली मान 1, 1.414, 2, 2.828, 4, 5.657, 8, 11.314, 16, 22.627, 32 हैं। डायल पर 1.4, 2.8, 5.6, 11, 22 खुदा होता है। शटर 2 के गुणक में बढ़ते हैं: असली मान 1/64, 1/128, 1/256 s हैं, खुदे 1/60, 1/125, 1/250। f/11 और f/22 सबसे ज़्यादा कटे हैं (−0.081 पायदान), फिर 1/60–1/30–1/15 वाला परिवार (−0.093 पायदान)। जहाँ ये मिलते हैं — छह खाने — अंतर 0.174 तक पहुँचता है, लगभग छठा हिस्सा। तस्वीर में नहीं दिखता, पर दो कैलकुलेटर अलग उत्तर क्यों देते हैं, कारण यही है।

समान EV का विकर्ण

अपर्चर एक पायदान बंद कीजिए और शटर एक पायदान धीमा — EV वही रहता है। इसलिए समान EV वाले खाने विकर्ण पर बैठते हैं। सबसे लंबी पंक्ति ग्यारह खानों की है, कोनों की ओर छोटी होती जाती है।

EV वही, तस्वीर अलग

एक ही विकर्ण के खाने फ़िल्म या सेंसर पर उतनी ही रोशनी डालते हैं। फिर भी तस्वीरें अलग होती हैं: खुला अपर्चर पृष्ठभूमि धुंधली करता है, धीमा शटर चलती चीज़ को। बस चमक समान रहती है।

सनी 16 नियम

तेज़ धूप में f/16 रखिए और शटर को ISO के व्युत्क्रम पर। ISO 100 पर वह 1/100 s होगा, जो डायल पर नहीं है, इसलिए 1/125 s लेते हैं — इस तालिका में f/16 · 1/125 का EV 15 है, और EV 15 का मतलब तेज़ धूप। मीटर न हो तो आज भी काम आता है।

ISO बढ़ाने पर

ISO भी हर पायदान पर दोगुना होता है, इसलिए उसे दोगुना करने पर EV एक बढ़ जाता है: वही अपर्चर और शटर अब एक पायदान अंधेरा दृश्य भी संभालते हैं।

कैसे पढ़ें

  • EV = log2(अपर्चर² ÷ एक्सपोज़र समय)। f/1.0 पर एक सेकंड यानी EV 0।
  • पैमाना हर पायदान पर दोगुना होता है, इसलिए EV दोनों पैमानों की स्थिति का योग है।
  • अपर्चर एक पायदान बंद करने पर EV एक बढ़ता है; शटर एक पायदान तेज़ करने पर भी।
  • समान EV वाले खाने विकर्ण पर होते हैं — समान रोशनी देने वाले संयोजन।
  • ISO दोगुना करने पर EV एक बढ़ता है।
  • खुदे अंक गोल किए हुए हैं, इसलिए उनसे गणना करने पर EV 0.174 तक भटकता है।

सामान्य प्रश्न

Q. EV क्या मापता है?

अपर्चर और शटर मिलकर जो रोशनी तय करते हैं, उसे एक संख्या में रखता है: EV = log2(अपर्चर² ÷ समय), और f/1.0 पर एक सेकंड शून्य है। हर पायदान ऊपर रोशनी आधी।

Q. अपर्चर का वर्ग क्यों?

f-संख्या फोकल लंबाई को छिद्र के व्यास से भाग देकर मिलती है, इसलिए बड़ी संख्या का मतलब छोटा छिद्र। आने वाली रोशनी क्षेत्रफल के अनुपात में है, और क्षेत्रफल व्यास के वर्ग के — इसलिए f-संख्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती।

Q. f/11 के बाद f/16 क्यों?

क्योंकि पैमाना √2 के गुणक में चलता है। आठ गुना √2 = 11.314, जो 11 लिखा जाता है, और 11.314 × √2 = 16। बस 11 ही खटकता है।

Q. बिना मीटर के अंदाज़ा लगा सकते हैं?

तेज़ धूप लगभग EV 15, बादल 13, खुली छाया 10, रोशन कमरा 7। सनी 16 नियम — f/16 और शटर ISO के व्युत्क्रम पर — इसी से निकलता है।